यिर्मयाह 9:23-24 (Jeremiah 9: 23-24)

यिर्मयाह 9:23-24

"यहोवा यों कहता है, बुद्धिमान अपनी बुद्धि पर घमण्ड न करे, न वीर अपनी वीरता पर, न धनी अपने धन पर घमण्ड करे; परंतु जो घमण्ड करे वह इसी बात पर घमण्ड करे, कि वह मुझे जानता और समझता है, कि मैं ही वह यहोवा हूँ, जो पृथ्वी पर करूणा, न्याय और धर्म के काम करता है; क्योंकि मैं इन्हीं बातों से प्रसन्न रहता हूँ॥"

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सांसारिक जीवन में हम देखने पाते हैं कि हर व्यक्ति अपनी खुद की आवश्यकताओं को पुरा करने में लगा हुआ है। हर कोई पारिवारिक और सांसारिक गतिविधियों में अपना समय व्यतीत कर रहा है। हर व्यक्ति एक दुसरे से प्रतिस्पर्धा में लगा हुआ है, और अपने आप को प्रथम स्थान में देखना चाहता है। जिसके फलस्वरूप लोगों में घमण्ड की भावना उत्पन्न हो गयी है।

विश्वास की जगह, घमण्ड में लोग अपना जीवन व्यतीत कर रहे हैं। कोई अपने धन पे, कोई अपने बुद्धिमान होने पर, तो कोई अपने वीर होने पर। ऐसा व्यतीत होता है मानों जैसे घमण्ड की लंबी कतार सी बन गयी हो।
इन्हीं बातों और कामों पर हर कोई अपने आपको प्रसन्न समझता है। पर मनुष्य ये भूल गया कि पर्मेश्वर पिता इन सभी बातों से कभी भी खुश नहीं हो सकते।

पर्मेश्वर का वचन कहता है कि हम सब पर्मेश्वर और उनके वचनों को सीखने और समझने पर घमण्ड करें, और जानें कि वही हमारा यहोवा है, जो इस पृथ्वी पर अदभुत रीति से कार्य करता है। वही करूणा, वही न्याय और वही धर्म के कामों को पूर्ण करता है।

वही हमारा ढाल भी है, जो समय समय पर हमें बचाता भी है।
पर्मेश्वर अच्छे कामों से, अच्छे संगति से ही प्रसन्न होता है, न कि द्वेष से और न ही घमण्ड से।

पर्मेश्वर इस छोटी शिक्षा पर आशीष दे॥ आमीन ॥

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द्वारा 
(नवीन मिंज)
 
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